Tuesday, December 6, 2022
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अमरता की खोज हिंदी कहानी | hindi kahani

मृत्यु एक परम सत्य है। लेकिन लोगों को पता होने के बावजूद वह हमेशा मृत्यु से भय भीत होकर अपना जीवन जीते है। इस दुनिया में बहुत से ऐसे भी लोग हुए जिन्होंने मृत्यु को जीतने के प्रयास में अपना सब कुछ हार गए। लेकिन मृत्यु तो मृत्यु है वो कहाँ किसी के वश में आती है। बल्कि जो उसके वश में आ जाता है वो सभी दुखों से मुक्ति पा लेता है। 

हमारा ये जीवन बहुत कठिनाइयों से भरा पड़ा है रोज ही नित्य कुछ न कुछ नई चुनौतियों का सामना हमे करना होता है। अभी तक न जाने कितने दुख दर्द का सामना हमे किया है और न जाने कितने दुख दर्द और हमारा आगे रास्ता देख रहे है। फिर भी हम हमारे जीवन को उच्चा और सबसे अच्छा बनाने में अपनी पूरी ताकत, ज्ञान और सामर्थ्य झोकें जा रहे है। 

लेकिन जैसा की आप कितने ही अच्छे या कितने ही बुरे या कितने ही बलिष्ठ या धनवान क्यों न बन जाएँ एक दिन यह सब का सब यही धार रह जायेगा और मृत्यु हमे अपने साथ सारे बंधन से मुक्त कर ले जाएगी। इतना भी सभी को पता है और हम लगभग रोज ये चीज याद भी करते है, या इस विषय में चर्चा भी करते है। लेकिन फिर भी इससे बचने के उपाय करते रहते है। 

तो  चलिए जानते अमरता की खोज में निकले एक राजा की कहानी 

एक समय की बात है। एक राजा अपने राज्य का विस्तार करने के लिए अपनी सेना लेकर पूरी धरती को जीतने निकल पड़ा, इसके साथ उस समय के बड़े बड़े शक्तिसाली योद्धा उसकी सेना का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

और उनकी सेना लगातार धरती के भूखण्डों को अपने राज्य में मिताली जा रहीं थी। देखते ही देखते उस राजा का राज्य विस्तार चारों दिशाओं में हो गया। उसने अपने आसपास की सारी धरती पर अपना स्वामित्व जमा लिया। 

एक दिन उसने अपने जीत का जश्न रखा उसके सभी दोस्त रिस्तेदार और योद्धा उसके इस जश्न में हिस्सा लेने उस जगह उपस्थित थे। 

जश्न के दौरान उस राजा को ख्याल आया की जितना भी मेने अभी तक धन जमा किया है और जमीन को अपने राज्य में मिलाया है यह एक न एक दिन मुझसे छूट ही जाएगी। तो मेने जो इतने संघर्ष किये कस्ट उठाए ये सब विफल हो जाएगा। ऐसे विचार राजा के मन में आते ही राजा डर गया। फिर राजा ने सोचा क्यूँ न में मृत्यु पर विजय पा कर अमर हो जाऊँ क्योंकि उसने कभी सुन रखा था की अमर हुआ जा सकता है। तो उसने अपने जश्न में आए सभी लोगों को कहाँ की जो भी मुझे अमर होने का तरीका बतएगा उसे में अपना आधा राज्य दे दूंगा। 

तो एक बूढ़े व्यक्ति ने राजा को बताया की यहाँ से पूर्व की और जाओ पूरब के कुछ शिद्ध साधुओं को अमता के बारे में पता है।   तो फिर क्या था अगले ही दिन राजा अपने सैनिकों के साथ पूरब की ओर निकल पड़ा ,और कई महीनो का सफर कर वह पूरब की जमीन में पहुँचा। उसने अपने सैनिकों को  आदेश दिया की ऐसे व्यक्ति को खोजो जिसे अमरता का पता हो। आदेश पाते ही सैनिक एसे व्यक्ति की खोज में निकला पड़े। खोजते खोजे उन्हें जंगल एक बूढा सा व्यक्ति दिखा लो लंगोट पहने पेड़ के नीचे एक शिला पर आनंद भाव से परिपूर्ण बैठे हुए है। 

सैनिकों ने सोचा इस जंगल में ये बूढा इतने मजे से बैठा है जरूर यह कोई साधू ही है और ऐसे अमरता का राज जरूर पता होगा। तो सैनिकों ने उस बूढ़े साधु से कहा की आपको हमारे साथ चलना होगा ,लेकिन साधु वहाँ से तस का मस नहीं हुआ। सैनिकों ने एक बार फिर जोर देकर साधु से उनके साथ चलने को कहा लेकिन साधू ने साफ़ मना कर दिया , साधु पर अपनी बात का असर न होता देख सैनिकों ने अपनी तलवार निकाल ली और साधु को जान से मरने की बात कहने लगे। लेकिन साधु तो बिलकुल भी नहीं डरा और उन सैनिकों से बोला में कहीं नहीं जाऊंगा यदि तुम्हारे राजा को अमर होना है तो उन्हें खुद यहाँ आना होगा। 

ऐसा सुनकर सैनिकों को अस्चर्य हुआ की इन्हे कैसे पता चला कि हम क्या खोज रहे है। फिर सैनिकों ने इसकी सूचना राजा को दी की हमे ऐसा व्यक्ति मिल गया है जो आपको अमर होने का राज बता सकता है ,लेकिन समस्या यह है की वह यहाँ नहीं आना चाहते आपको खुद वहाँ जाना होगा। राजा यह सुनकर अपने घोड़े में सवार हो साधु के पास जाता है और अकड़ भरी आवाज में बोलता है तुम्हें अमरता का राज पता है मुझे अमर होना है मिझे बताओ में अमर कैसे हो सकता हूँ। 

साधु ने बोला पहले तुम इस मुर्ख घोड़े पर से नीचे उतरो और जमीन में बैठो ,राजा ने वैसा ही किया फिर साधु ने राजा को बताया यहाँ से उत्तर की दिशा में जाओ 2 दिन और एक रात का सफर करने के बाद एक पहाड़ मिलेगा उस पहाड़ की गुफा में एक निर्मल पानी का कुण्ड है उस कुण्ड के पानी को पीने से तुम अमर हो जाओगे। 

ऐसा सुनकर राजा तुरंत उस दिशा में अपने सैनिकों के साथ निकल जाता है। 2 दिन और एक रात का सफर कर वह उस पहाड़ के पास पहुँच जाता है। अपने सैनिकों को पहाड़ के पास रुकने को बोलकर राजा गुफा के अंदर चला जाता है। वहाँ उसे वह कुंड दिखाई देता है राजा की आखों में चमक आ जाती है। वह दौड़ कर उस कुण्ड के पास जाता है। 

और अपने हाथों में कुण्ड का पानी लेकर पीने वाला ही होता है की उसे किसी की आवाज आती है और वह देखता है की कुंड के उस पार एक पक्छी बैठा है और वह बहुत दुखी है। 

राजा ने उसके दुख का कारण पूछा पक्छी ने जवाब दिया मैने भी इस कुंड का पानी पिया है और अब में मर नहीं सकता , राजा यह सुनकर बोला तुम तो अमर हो गए हो फिर भी दुखी क्यों हो , तो पक्छी ने कहा में मरना चाहता हूँ लेकिन चाह कर भी में मर नहीं सकता मेरे भाई बहना रिस्तेदार और सभी दोस्त मर चुके है मैने अपनी कई  पीढ़ियों को अपने सामने मरते देखा है ,मुझे जो प्रिय थे वो सभी मर गए लेकिन में अभी भी जीवित हूँ। ये जीवन मुझपर बोझ बन गया है अब में मरना चाहता हूँ लेकिन मर नहीं सकता। उस पक्छी की बाते सुनकर राजा अपने मन में कुछ सोचता है। और बिना पानी पिए वहाँ से वापस चला जाता है। 

मनुष्य हमेशा उसके पीछे भागता है जो उसके पास नहीं है ,और जो पास है उसकी क़द्र नहीं करता। 

कृपया आप अपनी राय हमें बताएं की राजा ने उस कुण्ड का पानी न पीकर अच्छा  किया या उसका यह फैसला मूर्खता पूर्ण था।  

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