Tuesday, December 6, 2022
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पोथी की रक्षा, चतुर ब्राह्मण की कहानी

एक समय की बात है एक गांव में एक ब्राम्हण परिवार रहता था ,उस परिवार में दो भाई रहते थे। बड़ा भाई  शिक्षा के मामले में होसियार था। लेकिन छोटे भाई का पढ़ाई में कुछ ज्यादा मन नहीं लगता था। वह अपना ज्यादातर समय खेल कूद में ही बिताता था। किताबों के ज्ञान उसे कम समझ आते थे। इस कारण वह अपने पिता से हमेशा डांट खता था। ऐसा उसके जीवन में लगभग रोज ही होते रहता था। 

एक दिन उनके पिता में दोनों भाइयों को पंडिताई और वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए कासी जाने को कहा। ये सुनकर बड़े भाई ने तुरंत हामी भर दी लेकिन छोटा भाई संकोच भरे शब्दों में जाने से माना कर दिया। 

पिता ने कहा जैसा तुम चाहो ये कह कर पिता ने अपने बड़े बेटे को जाने कि तयारी करने को कहा। यह सुने ही बड़ा बीटा खुश होते हुए अपना सामान बांधने लगा। दुसरे दिन वह पंडिताई और वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए घर से सभी को प्रणाम कर चला गया। 

अब छोटा भाई वही गांव में रहकर अपनी बाकि की शिक्षा प्राप्त करता है। क्योंकि उसे किताबों का ज्ञान ज्यादा समझ नही आता था तो वह अपने गुरु से तार्किक ज्ञान को सीखने में ज्यादा ध्यान देता था। वह बात करने में बाते बनाने में और लोगों को समझने में माहिर हो गया था। वह पोथी पुराण कम ही पढ़ता लेकिन उन्हें समझता ज्यादा था। 

फिर एक दिन वो भी आ गया जब दोनों की शिक्षा पूरी हुई। हाँ लेकिन वो बात अलग है की छोटे भाई ने रोते धोते जैसे तैसे अपनी शिक्षाको पूरा किया था। लेकिन चलो जैसे तैसे शिक्षा पूरी तो हुई।

चूँकि बड़ा भाई पंडिताई और वेदों का ज्ञान प्राप्त करके बाहर से आया था तो गांव  के लोग उसे ज्यादा मन सम्मान देते थे। और जहाँ भी कथा वाचन ,पूजन या पंडिताई का काम होता ज्यादातर लोग उसे (बड़े भाई )ही बुलाते थे। 

बड़े भाई का आसपास के गावों में कुछ ज्यादा ही नाम होने लगा इससे हुआ क्या की दुसरे गाँव के कुछ पंडित लोगों में बड़े भाई के प्रति ईर्ष्या की भावना आने लगी। क्योंकि उनका काम भी इसके (बड़े भाई) कारण प्रभावित होने लगा था। 

तो एक दिन की बात है दुसरे गांव के लोगों ने योजना बनाकर ब्राम्हण के बड़े बेटे को अपने गांव कथा बाचने के लिए आमंत्रित किया। 

आमंतरण पाने पर ब्राह्मण के बड़े बेटे ने अपनी पोथी अपने साथ लिया और निकल पड़ा दुसरे गाँव कथा वाचन को। गाँव पहुंचने पर उस गांव के लोगों ने उनका स्वागत किया और आसान पर बैठ कर कथा सुनाने को कहा। 

ऐसा सुनकर ब्राह्मण के बड़े बेटे ने अपनी पोथी निकली और अपने सामने रखते हुए जैसे ही कथा चालू करने को हुवा तो वहाँ जो कुछ लोग कथा सुनने आए थे उनमे से एक उठा और बोला ,कि ,महराज आप तो बड़े ज्ञानी लगते है। ऐसा लगता है आप को तो सभी चीजों का ज्ञान है। 

ऐसा सुनकर ब्राह्मण के बड़े बेटे बोला हाँ बिलकुल है। तुम चाहे तो कुछ भी पूछ लो। 

ऐसा सुनकर वह व्यक्ति बोला महाराज आप तो ज्ञानी है। मै आपसे क्या पूछ सकता हूँ ,लेकिन अपने कहा है तो मै एक सवाल अपने पूछना चाहता हूँ। कृपया जवाब दें 

ऐसा  कह कर उस व्यक्ति ने सवाल पुछा – बोलो महराज पहले दुनिया में मुर्गी आई या अंडा। 

ये सवाल सुनकर ब्राम्हण का बड़ा बेटा सोच में पड़ गया। उसे अपने ज्ञान के भंडार में खूब गोता लगाया लेकिन उसे इस सवाल का जवाब नहीं मिला। और मिलता भी तो कैसे इस सवाल का जवाब तो अभी तक कोई भी ठीक से नहीं दे पाया है तो उस ब्राम्हण के बेटे को उस समय कहां पता होगा। वैसे भी बेचारा ब्राम्हण उसका मुर्गी और अंडे से क्या ही मेल उसे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था की अब क्या करे। वैसे क्या आपको इस सवाल का सही सही जवाब मालूम है क्या। कमेंट के माध्यम से हमे जरूर बताएं। 

ओह चलिए लौटते है अपनी प्रेरणादायक कहानी में 

इतने में वहाँ के लोगें ने कहना शुरू कर दिया की इन पंडित जी को तो कुछ नहीं पता है। तो इनका कथा वाचन हम कैसे सुने। और ब्राम्हण के बेटे का मजाक उड़ाते हुए हॅसने लगे। 

ये देख ब्राह्मण के बड़े बेटे ने सोचा यहाँ से निकलने में ही भलाई है और जाने लगा। लेकिन उस गांव के लोगों ने उन्हें अपनी पोथी वहीं छोड़ कर जाने को कहा। ये सुनकर ब्राह्मण के बड़े बेटे ने अपनी पोथी वहीं छोड़ी और अपने गांव आ गया। 

गांव आने पर उसके छोटे भाई ने पुछा की कैसा रहा कथा वाचन तो बड़े भाई में सारी घटना अपने छोटे भाई से कह सुनाई। अपने बड़े भाई की बातों को सुनकर छोटे भाई को गुस्सा आया और उसने फैसला किया की वह उस गाँव में जाकर उन्हें मजाचखाकर अपने बड़े भाई की पोथी वापस लाएगा। 

वह तुरंत उस गांव के लिए निकल गया और वहाँ पहुंचकर अपने बड़े भाई के अपमान का बदला लेने की योजना पर काम करने लगा। 

छोटे भाई ने वहां के लोगों से अपने बड़े भाई की पोथी मांगी तो वहां के लोगों ने कहा यदि तुम्हे पोथी वापस चाहिए तो पहले हमे कथा सुनाओ। 

छोटा भाई उनकी बात को मानते हुए कथा सुनाने की बात को मन लेता है। 

लेकिन गांव वाले उसके सामने एक सर्त रखते है की तुम जो कथा सुनावोगे उसके हर एक अध्याय के बाद हम हरे नमः करेंगे ,और तुम जब तक कथा सुनते रहोगे जब तक हम हरे नमः कहते हुए थक न जाएँ। 

ब्राह्मण का छोटा बेटा बाते बनाने में माहिर था और उसे तार्किक ज्ञान ज्यादा था। तो उसने उनकी बात मानते हुए हांमी भरी और एक ऐसी कथा की सुरुवात की जो बहुत ही रोचक है। 

लोगों को लगा की ऐसे सर्त में फसा कर हम इसकी भी पोथी छीन लेंगें। क्योंकि किसी भी कथा का अध्याय लंबा होता है और सर्त के अनुसार उन्हें केवल अध्याय के अंत में ही हरे नमः बोलना है ,जबकि पंडित (ब्राम्हण के छोटे बेटे ) को पूरी कथा को पढ़ना है ,और वो भी जब तक हम हरे नमः बोलना न छोड़ दें। 

तो ब्राम्हण के छोटे बेटे ने अपनी बात शुरू की। 

यह कथा बहुत ही रोचक और गूढ़ रहस्यों से भरी हुई है तो कृपया इसे ध्यान से सुने और अध्याय के अंत में हरे नमः कहें। यदि अपने हरे मनः की जहग कुछ और कहने लगे तो मैं कथा वचन बंद कर दूंगा और अपने भाई का पोथी लेकर वापस चला जाऊंगा। 

ये सुनकर सभी लोग हॅसे और हामी भरी और कथा सुनाने को कहा। 

तो ब्राम्हण के छोटे बेटे ने अपनी कथा शुरू की।

यह कथा उस समय की है जब भगवान ने सभी जीवों को बनाया। उसे क्रम में उन्होंने पक्छियों को भी बनाया। यह सभी पक्छियों में गरुण को पक्षियों का राजा बनाया और गरुण को सबसे ज्यादा ताकत दी। प्रथम अध्याय समाप्त  

सभी लोग बोले    –  हरे नमः

पंडित – गरुण भगवन विष्णु की सवारी है ,भगवन विष्णु को वह अपनी पीठ पर बिठा कर सभी जगह घूमता है। लेकिन ज्यादा शक्ति के कारन करुण में घमंड समा गया था। इस कारण वह दुसरे पक्छियों को डरता ,धमकाता रहता था। सभी पक्छी उसकी इस हरकत से परेशान थी। 

सभी लोग बोले  –  हरे नमः

पंडित – पंडित ने कथा आगे सुनते हुए बोला ,इस परेशानी से परेशान होकर सभी पक्षियों के गरुण के शिकायत भगवान विष्णु से करने की सोची। और अभी ने एक जगह इखट्टा होने का प्लान बनाया। लेकिन किसी तरत गरुण को इस बात की खबर लग गई। 

सभी लोग बोले   – हरे नमः

पंडित – इसके बाद गरुण ने सभी पक्छियों से नाराज होकर उन्हें अपना बंदी बनाने के बारे में सोचा। 

सभी लोग बोले  — हरे नमः

पंडित – गरुण ने उस जगह एक बड़ा सा जाल लगा दिया जहाँ सभी पक्छी मिलकर प्लान बनाने वाले थे। 

सभी लोग बोले   —  हरे नमः

पंडित – जब सभी पक्छी वहाँ पहुंचे तो जाल में फास गए। 

सभी लोग बोले     – हरे नमः

पंडित – गरुण ने देखा की सभी पक्छी मेरे जाल में फस गए है तो उसने जाल उठाया और वहाँ से जाने लगा। सारे पक्छी घबरा गये और उस जाल से निकलने की कोसिस करने लगे। 

सभी लोग बोले   –  हरे नमः

पंडित – जैसे तैसे बड़ी मेहनत के बाद उस जाल में एक छेद हो गया। 

सभी लोग बोले  –   हरे नमः

पंडित – उस छेद में से एक पक्छी निकला फुर्ररर 

सभी लोग  बोले  हरे नमः

पंडित – दूसरा पक्छी फुर्रर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – तीसरा पक्छी फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित – फुर्ररर 

सभी लोग बोले  – हरे नमः

पंडित फुर्ररर बोलता और सभी लोगों को हरे नमः बोलना पडता। कुछ समय तो ठीक चला लेकिन लोगों की जबान धीरे धीरे फिसलने लगी और वो लोग भी हरे नमः की जगह फुर्ररर ,फुर्ररर फुर्ररर बोलने से अपने आप को रोक नहीं सके। और थोड़ी देर बाद पंडित की ही तरह फुर्र फुर्ररर फुर्ररर बोलने लगे। जैसे ही पंडित (ब्राम्हण का छोटा बेटा ) ने सुना की लोग हरे नमः की जगह फुर्र फुर्ररर बोलने लगे उसने लोगों से बोला की आप लोग सर्त हार गए है। अब मैं कथा बंद करता हूँ। क्यों की सर्त के अनुसार आप हरे नमः नहीं बल्कि फुर्ररर फुर्र्र बोल रहे थे। 

इस तरह उसने अपने बड़े भाई की पोथी प्राप्त की और उनके अपमान का बदला लिया। 

शाम  को जब ब्राम्हण का छोटा बेटा अपने गांव लौटा तो सभी ने उसका स्वागत किया और सराहना भी की। उस दिन से लोगों ने माना की केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। मनुष्य के विकाश के लिए किताबी ज्ञान के साथ साथ व्यावहारिक ज्ञान तार्किक ज्ञान की भी आवस्यकता होती है। 

आपको भी केवल किताबी ज्ञान पर ही फोकस नहीं करना है बल्कि अपने आस पास घटित होने वाली घाटनों ,परिस्थितयों ,और समस्यों से भी सीखना चहिये। जितना आप प्रैक्टिकल होंगे उतनी ज्यादा आपकी समझ बढ़ेगी। और बेहतर ढंग से आप अपना विकाश कर पाएंगे। 

आपको यह प्रेरणादायक कहानी कैसी लगी हमे जरूर बताएं। हमने आपके लिए और भी बहुत सी bacchon ki kahani  प्रेरणादायक हिंदी कहानी, का संग्रहण किया है जिनका लिंक इस पोस्ट में है आप उन्हें भी पढ़ें,

मुझे उम्मीद है आपको भी यह कहानियाँ कुछ प्रेरणा देंगी पर और अपने सोचने के नजरिये को एक नए आयाम में ले जाएँगी। जहाँ आपको कुछ सीखने के साथ साथ नया अनुभव भी मिलेगा और आपके ज्ञान के भंडार में और वृद्धि होगी। 

आपने हमे इतना समय दिया ह्रदय की गहराइयों से आपका बहुत बहुत धन्यवाद। 

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