Friday, December 9, 2022
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अनुभव की कंघी हिंदी कहानी | hindi kahani anubhav ki kanghi

ये कहानी एक रेगिस्तानी देश कि है जहाँ पर एक बूढा व्यपारी था जो अपने  व्यापारीक  समझ के कारण खूब धन कमा रहा था | उस देश का वह सबसे धनी व्यापारी बन गया था | वो दूर-दूर से कीमती वस्तुवें ,और आनाज लाकर उसे शहरोें में बेचता था उसकी व्यापार करने कि कला बहुत ही अच्छी थी इस कारण वह बहुत सा लाभ कमाता था | वो अपनी इस कामयाबी से बहुत खुश था | इसलिये उसने सोचा व्यापार बढ़ाना चाहिये और उसने दुसरे देश में जाकर व्यापार करने की सोची |

दुसरे देश जाने के रास्ते का मानचित्र देखा गया जिसमे साफ-साफ था कि रास्ते में एक बहुत बड़ा मरुस्थल हैं | खबरों के अनुसार उस स्थान पर कई लुटेरे भी हैं | लेकिन बूढा व्यापारी कई सपने देख चूका था | उस पर दुसरे देश में जाकर धन कमाने की इच्छा प्रबल थी | उसने अपने कई किसान साथियों को लेकर जाने की ठान ली | बैलगाड़ियाँ तैयार की और उस पर कीमती वस्तुवें और अनाज लादा | और निकल पड़ा अपने कारवा को लेकर दुसरे देश की ओर। 

बूढ़े व्यापारी के कारवा में कई लोग थे जिसमे कुछ जवान युवक भी थे और वृद्ध अनुभवी लोग भी थे ,जो बरसो से बूढ़े व्यापारी के साथ काम कर रहे थे | जवानो के अनुसार अगर इस कारवा ( यात्रा ) का नेत्रत्व कोई नव जवान करता तो अच्छा होता क्यंकि यह वृद्ध बूढ़ा व्यापारी तो धीरे-धीरे जायेगा और पता नही उस मरुस्थल में क्या-क्या देखना पड़ेगा |

तब कुछ नौ जवानो ने मिलकर अपनी अलग टोली बना ली और स्वयम का माल ले जाकर दुसरे देश  में जाकर व्यापार करने की ठानी | बूढ़े व्यापारी को उसके पुराने लोगो ने इस बात की सुचना दी | तब बूढ़े व्यापारी ने कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं दिखाई उसने कहा सबको अपना फैसला लेने का हक़ हैं | अगर वो मेरे इस काम को छोड़ अपना शुरू करना चाहते हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं | और भी जो उनके साथ जाना चाहता हो जा सकता हैं |

अब दो अलग व्यापारियों की टोली बन चुकी थी जिसमे एक का नेत्रत्व बूढ़ा व्यापारी कर रहे थे और दुसरे का नेत्रत्व नव जवान कर रहे थे | दोनों की टोली में वृद्ध एवम नौ जवान दोनों सवार थे |

सफ़र शुरू हुआ | बूढ़ा  व्यापारी और नौजवान अपनी अपनी टोली लेकर चल पड़े | थोड़ी दूर सब साथ –साथ ही चल रहे थे कि जवानो की टोली तेजी से आगे निकल पड़ी और बूढ़ा  व्यापारी और उनके साथी पीछे रह गये | बूढ़ा  व्यापारी की टोली के नौजवान इस धीमी गति से बिलकुल खुश नहीं थे और बार-बार बूढ़ा  व्यापारी को कौस रहे थे,कहते कि वो नौ जवानो की टोली तो कब की नगर की सीमा लाँघ चुकी होगी और कुछ ही दिनों में मरुस्थल भी पार कर लेगी | और हम सभी इस बूढ़े के कारण भूखे मर जायेंगे |

धीरे-धीरे बूढ़ा  व्यापारी की टोली नगर की सीमा पार करके मरुस्थल के समीप पहुँच जाती हैं |तब बूढ़ा  व्यापारी सभी से कहते हैं यह मरुस्थल बहुत लंबा हैं और इसमें दूर दूर तक पानी की एक बूंद भी नहीं मिलेगी, इसलिये जितना हो सके पानी भर लो | और सबसे अहम् यह मरुस्थल लुटेरे और डाकुओं से भरा हुआ हैं इसलिये हमें यहाँ का सफ़र बिना रुके करना होगा | साथ ही हर समय चौकन्ना रहना होगा |

उन्हें मरुस्थल के पहले तक बहुत से पानी के गड्ढे मिल जाते हैं जिससे वे बहुत सारा पानी संग्रह कर लेते हैं | तब उन में से एक पूछता हैं कि इस रास्ते में पहले से ही इतने पानी के गड्ढे हैं,हमें एक भी गड्ढा तैयार नहीं करना पड़ा | तब बूढ़ा  व्यापारी बोलते हैं इसलिए तो मैंने नव जवानों की उस टोली को आगे जाने दिया | यह सभी उन लोगो ने खुद के लिए तैयार किया होगा जिसका लाभ हम सभी को मिल रहा हैं | यह सुनकर कर टोली के विरोधी साथी खिजवा जाते हैं | और अन्य, बूढ़ा  व्यापारी के अनुभव की प्रशंसा करने लगते हैं | सभी बूढ़ा  व्यापारी के कहे अनुसार बंदोबस्त और आराम करके आगे बढ़ते हैं |

आगे बढ़ते हुए बूढ़ा  व्यापारी सभी को आगाह कर देता हैं कि अब हम सभी मरुस्थल में प्रवेश करने वाले हैं | जहाँ ना तो पानी मिलेगा, ना खाने को फल और ना ही ठहरने का स्थान और यह बहुत लम्बा भी हैं | हमें कई दिन भी लग सकते हैं | सभी बूढ़ा  व्यापारी की बात में हामी मिलाते हुए उसके पीछे हो लेते हैं |

अब वे सभी मरुस्थल में प्रवेश कर चुके थे | जहाँ बहुत ज्यादा गर्मी थी जैसे अलाव लिये चल रहे हो |आगे चलते-चलते उन्हें सामने से कुछ लोग आते दिखाई देते हैं | वे सभी बूढ़ा  व्यापारी को प्रणाम करते हैं और हाल चाल पूछते हैं | उन में से एक कहता हैं आप सभी व्यापारी लगते हो, काफी दूर से चले आ रहे हो, अगर कोई सेवा का अवसर देंगे तो हम सभी तत्पर हैं | उसकी बाते सुन बूढ़ा  व्यापारी हाथ जोड़कर कह देता हैं कि भाई हम सभी भले चंगे हैं, तुम्हारा धन्यवाद जो तुम सभी ने इतना सोचा | और वे अपने साथियों को लेकर आगे बढ़ जाते हैं | आगे बढ़ते ही टोली के कुछ नव युवक फिर से बूढ़ा  व्यापारी को कौसने लगते हैं कि जब वे लोग हमारी सहायता कर रहे हैं तो इस बूढ़ा  व्यापारी को क्या परेशानी हैं ?

कुछ दूर चलने के बाद फिर से कुछ लोग सामने से आते दिखाई देते हैं जिनके वस्त्र गिले थे और वे बूढ़ा  व्यापारी और उसके साथियों को कहते हैं कि आप सभी राहगीर लगते हो और इस मरुस्थल के सफर से थके लग रहे हो | अगर आप चाहो तो हम आपको पास के एक जंगल में ले चलते हैं | जहाँ बहुत पानी और खाने को फल हैं | साथ ही अभी वहाँ पर तेज बारिश भी हो रही हैं | उसी में हम सभी भीग गये थे | अगर आप सभी चाहे तो अपना सारा पानी फेक कर जंगल से नया पानी भर ले और पेट भर खाकर आराम कर ले | लेकिन बूढ़ा  व्यापारी साफ़ ना बोल कर अपने साथियों से जल्दी चलने को कह देते हैं |

अब टोली के कई नौ जवानो को बूढ़ा  व्यापारी पर बहुत गुस्सा आता हैं और वे उसके समीप आकर अपना सारा गुस्सा निकाल देते हैं और पूछते हैं कि क्यूँ वे उन भले लोगो की बात नहीं सुन रहे और क्यूँ हम सभी पर जुल्म कर रहे हैं | तब बूढ़ा  व्यापारी मुस्कुराते हुए कहते हैं कि वे सभी लुटेरे हैं और हमसे अपना पानी फिकवा कर हमें निसहाय करके लुट लेना चाहते हैं और हमें यही मरने छोड़ देना चाहते हैं | तब वे नव युवक गुस्से में दांत पिसते हुये कहते हैं कि सेठ जी तुम्हे ऐसा क्यूँ लगता हैं ? तब बूढ़ा  व्यापारी कहते हैं कि तुम खुद देखो, इस मरुस्थल में कितनी गर्मी हैं, क्या यहाँ आसपास कोई जंगल हो भी सकता हैं ,यहाँ की भूमि इतनी सुखी हैं कि दूर दूर तक बारिश ना होने का संकेत देती हैं | यहाँ एक परिंदे का घौसला तक नहीं तो फल फुल कैसे हो सकते हैं | और जरा निगाह उठाकर ऊपर देखो दूर-दूर तक कोई बारिश के बादल नहीं हैं, ना ही हवा में बारिश की ठंडक हैं, ना ही गीली मिटटी की खुशबु,तो कैसे उन लोगो की बातों पर यकीन किया जा सकता हैं ? मेरी बात मानो कुछ भी हो जाये अपना पानी मत फेंकना और ना ही कहीं भी रुकना |

कुछ देर आगे चलने के बाद उन्हें रास्ते में कई नरकंकाल और टूटी फूटी बैलगाड़ी मिलती हैं | वे सभी कंकाल नौजवान की टोली के लोगो के थे | उन में से एक भी नहीं बचा था | उनकी ऐसी दशा देख सभी रोने लगते हैं क्यूंकि वे सभी उन्ही के साथी थे | तब बूढ़ा  व्यापारी कहते हैं कि जरुर इन लोगो ने तुम्हारे जैसे ही इन लुटेरो को अपना साथी समझा होगा और इसका परिणाम यह हुआ, आज उन्हें अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा | बूढ़ा व्यापारी सभी को ढाढस बंधाते हुये कहते हैं हम सभी को भी यहाँ से जल्दी निकलना होगा क्यूंकि वे सभी लुटेरे अभी भी हमारे पीछे हैं | प्रार्थना करो कि हम सभी सही सलामत यहाँ से निकल जाये |

शिक्षा :

कहते अनुभव की कंघी तब हाँथ आती हैं, जब सर पर कोई बाल नहीं बचता। अर्थात अनुभव उम्र बीतने और जीवन जीने के बाद ही मिलता हैं | अनुभव कभी भी पूर्वजो की जागीर के रूप में नहीं मिलता | जैसे इस कहानी में नव जवानो में जोश तो बहुत था लेकिन अनुभव की नहीं थी जो कि बूढ़ा  व्यापारी के पास था, जिसका उसने सही समय पर इस्तेमाल किया और विपत्ति से सभी को निकाल कर ले गया |शिक्षा यही हैं कि किसी काम को करने के लिये जोश के साथ अनुभव होना भी बहुत जरूरी  हैं |

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