Saturday, December 10, 2022
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Munshi Premchand ka Jeevan parichay | मुंशी प्रेमचंद जीवन परिचय, रचनाएँ, भाषा शैली, साहित्य में स्थान

Munshi Premchand ka Jeevan parichay:– प्रेमचन्द सच्चे अर्थों में हिन्दी उपन्यासों के जन्मदाता तथा मौलिक एवं सर्वश्रेष्ठ कहानीकार भी हैं। इसी कारण वे जनता के मध्य उपन्यास सम्राट के रूप में विख्यात हैं। मुंशी प्रेमचंद का जन्म 1880 में काशी के लमही नामक गांव में हुआ. प्रेमचंद ने गद्य  लेख में अभूतपूर्व कार्य किया इनका मूल नाम धनपत राय था किंतु हिंदी में यह प्रेमचंद के नाम से रचना कार्य किया करते थे।

सोजे वतन (1907) इनका पहला कहानी संग्रह था जिसे ब्रिटिश सरकार ने जप्त कर लिया था। “सेवा सदन” वर्ष 1916 में प्रकाशित हुआ यह उनका पहला उपन्यास था इसके पश्चात उन्होंने वरदान, प्रेम आश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्म भूमि, गोदान आदि उपन्यासों की रचना की।

गोदान प्रेमचंद का अंतिम एवं सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है इन सभी उपन्यासों में प्रेमचंद ने गांव के किसान की करुणा वा त्रासदी को बड़े विशद रूप में प्रस्तुत किया है। प्रेमचंद जी ने उपन्यास साहित्य के साथ कहानी लेखन में भी विशेष रुचि दिखाई उनकी लगभग 350 कहानियां उपलब्ध हैं जो मानसरोवर शीर्षक से आठ भागों में प्रकाशित हुई |

Munshi Premchand

प्रेमचंद की सभी कहानियां भारत के समस्त सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन के यथार्थ पर अच्छा प्रकाश डालती हैं प्रेमचंद ने अपने पात्रों को आर्थिक विषमताओं से पीड़ित होने के कारण सदैव संघर्ष करते हुए दिखाया है।

Munshi Premchand ka Jeevan parichay

विषय जानकारिया
नाम मुंशी प्रेमचंद
पूरा नाम धनपत राय
जन्म 31 जुलाई 1880
जन्म स्थल वाराणसी के लमही गाँव मे हुआ था .
मृत्यु 8 अक्टूबर 1936
पिता अजायब राय
माता आनंदी देवी
भाषा हिन्दी व उर्दू
राष्ट्रीयता भारतीय 
प्रेमचंद की प्रमुख रचनाएं गोदान, गबन, कर्मभूमि, ईदगाह, पंचपरमेश्वर,

मुंशी प्रेमचंद की रचनाएँ

प्रेमचंद की प्रमुख रचना:- प्रेमचन्द ने हिन्दी गद्य की विविध विधाओं पर अपनी लेखनी के द्वारा हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। प्रेमचन्द उपन्यास सम्राट के नाम से विख्यात थे। इनकी कहानियाँ भी पाठकों को मन्त्रमुग्ध कर देती हैं। इनकी कृतियाँ निम्न प्रकार हैं

कहानियाँ-‘मानसरोवर’ तथा ‘गुप्तधन’ में आपकी तीन सौ से अधिक कहानियाँ संकलित हैं। पूस की रात, कफन, ईदगाह, पंचपरमेश्वर, परीक्षा, बूढ़ी काकी, बड़े घर की बेटी, सुजान भगत आदि प्रेमचन्द की प्रसिद्ध कहानियाँ हैं।

उपन्यास- वरदान, प्रतिज्ञा, सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, गबन, कर्मभूमि, निर्मला, कायाकल्प, गोदान और मंगलसूत्र (अपूर्ण)।

नाटक- कर्बला, संग्रमा और प्रेम की वेदी।

निबन्ध संग्रह- स्वराज्य के फायदे,कुछ विचार, साहित्य का उद्देश्य।

जीवनियाँ- महात्मा शेखसाथी, दुर्गादास,कलम-तलवार और त्याग।

 

मुंशी प्रेमचंद की भाषा शैली

भाषा- इन्होंने संस्कृत, अरबी एवं फारसी के प्रभाव से मुक्त भाषा का प्रयोग किया, जिससे जनसाधारण भाषा को समझ सकें। आपने हिन्दी,उर्दू का मिश्रण करके हिन्दुस्तानी भाषा का साहित्य में प्रयोग किया जो कि जनसामान्य की भाषा थी। . हिन्दी साहित्य में भारतेन्दु जी के समान प्रेमचन्द ने ही ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो

आज भी आदर्श रूप में प्रतिष्ठित हैं। प्रेमचन्द ने प्रारम्भ में उर्दू में साहित्य सृजन किया, बाद में हिन्दी में लेखन कार्य प्रारम्भ किया। शैली-उनकी भाषा-शैली सरस,प्रवाहमय तथा सरल है जिसे हिन्दू, मुसलमान शिक्षित, अशिक्षित भली प्रकार पढ़ तथा लिख सकते हैं। मुहावरों तथा कहावतों के प्रयोग से भाषा में चार चाँद लग गये हैं।

मुंशी प्रेमचंद की भाषा शैली का एक उदाहरण देखिए

“अँधेरा हो चला था। बाजी बिछी हुई थी। दोनों बादशाह अपने सिंहासनों पर बैठे हुए मानो इन दोनों वीरों की मृत्यु पर रो रहे थे।”

“अनुराग स्फूर्ति का भण्डार है।”

 

प्रेमचंद की साहित्यिक विशेषताएँ

साहित्य में स्थान – प्रेमचन्द अपने युग के लोकप्रिय उपन्यासकार हैं। उनकी लोकप्रियता का कारण यह है कि उन्होंने जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं तथा यथार्थता का सजीव चित्रण किया है। वे उपन्यास सम्राट के रूप में प्रसिद्ध हैं। ग्रामीण जीवन के कुशल शिल्पी हैं। उनके पथ का अनुसरण करते हुए समकालीन उपन्यासकार भी अपने उपन्यासों में आदर्श के सुनहरे चित्र उभारने लगे।

कहानी उपन्यास नाटक निबंध आदि गद्य साहित्य के समस्त विधाओं पर समान अधिकार रखने वाले अमर साहित्यकार प्रेमचंद जी ने हिंदी साहित्य और हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी इनकी भाषा सहज सजीव मुहावरेदार तथा बोलचाल के निकट है। प्रगतिशील चेतना को मुखर करने का श्रेय भी प्रेमचंद को ही जाता है प्रेमचंद की कहानियों तथा अपने औपन्यासिक कृतियों का अध्ययन करने पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि उनकी व्यापक सहानुभूति आम आदमी के साथ है जो उसके साहित्य की विशिष्टता को परिलक्षित करता है।

यह भी पढ़ें:-

मैथलीसरण गुप्त

कबीर दस

मुंशी प्रेम चंद

पण्डित रामनारायण उपाध्या

श्री लाल शुक्ल

राम बिकास बेनीपुरी

उम्मीद है आपको यह लेख पसंद आया होगा हमें और भी कवि और लेखकों का जीवन परिचय संछिप्त में लिखा है उम्मीद है वो भी आपको पसंद आएंगें।

 

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