Monday, February 6, 2023
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Swami Ramakrishna Paramahamsa in hindi | रामकृष्ण परमहंस

Swami ramakrishna paramahamsa in hindi रामकृष्ण परमहंस एक ऐसे संत जिनके बारे में भारत में सायद ही कोई ऐसा होगा जो उन्हें नहीं जानता होगा। माता काली के परम भक्त और काली पुत्र के नाम से वे विख्यात है।

रामकृष्ण परमहंस जी का सारा जीवन भक्ति में ही बीता उन्होंने सभी धर्मो के लिए आध्यात्मिक परमानंद का मार्ग निर्माण किया अनंत भक्ति को प्राप्त करने के कारण उन्हें परमहंस की उपाधि प्रदान की गई। इस पोस्ट में हम स्वामी विवेकानंद के गुरु भारत के प्रसिद्ध संत श्री रामकृष्ण परमहंस जी के बारे में जानेगें।

 Swami ramakrishna paramahamsa in hindi – रामकृष्ण परमहंस का जीवन परिचय

बिंदु जानकारी
नाम   श्री रामकृष्ण परमहंस
असली नाम  श्री गदाधर चट्टोपाध्याय
जन्म दिनांक  18 फरवरी 1836
जन्म स्थान  कमरपुकुर गाँव, हुगली जिला, बंगाल 
पिता का नाम  श्री खुदीराम चट्टोपाध्याय
माता का नाम  श्रीमति चंद्रमणि देवी
पत्नी  श्रीमति सरदमोनी देवी
धार्मिक दृश्य  हिंदू धर्म
दर्शन शक्तो, अद्वैत वेदांत, सार्वभौमिक सहिष्णुता
शिष्य  स्वामी विवेकानंद
अनुयायी  केशवचंद्र सेन, विजयकृष्ण गोस्वामी, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, बंकिमचंद्र चटर्जी, अश्विनी कुमार दत्त
मृत्यु  16 अगस्त 1886
मृत्यु का स्थान  कोसीपोर, कलकत्ता
स्मारक  कमरपुकुर गाँव जिला हुगली, पश्चिम बंगाल

 

रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, परिवार एवं शुरूआती जीवन (Birthday, Family and Early Life)

रामकृष्ण परमहंस जी एक महान योगी और विचारक थे, ये तो हम सभी जानते है लेकिन क्या आपको पता है इनका बचपन कई मुश्किलों भरा हुआ था। रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म 18 फरवरी 1836 को भारत के बंगाल राज्य में हुगली जिले के कामारपुकुर गांव में एक गरीब ब्राम्हण के घर हुआ था। माता पिता ने अपने इस पुत्र का नाम बड़े प्यार से गदाधर रखा।

Swami Ramakrishna Paramahamsa in hindi

रामकृष्ण परमहंस के माता का नाम चंद्रमणि देवी और खुदीराम चट्टोपाध्याय इनके पिता नाम था। गदाधर चट्टोपाध्याय कि शुरुवाती शिक्षा प्राप्ति के लिए उनका ग्राम स्कूल में प्रवेश करा दिया गया लेकिन बालक गदाधर चट्टोपाध्याय की रूचि अध्यन में कम ही रही।

बालक गदाधर को कृष्णाचरित सुनने और कृष्णा लीलाओं का मंचन करने में बड़ा आनदं आता था। वे बहुत ही मृदु भासी और विनम्र स्वभाव के थे बचपन से ही इनमे भक्ति की ज्योत जली हुई थी। बहुत काम आयु से ही बालक गदाधर धार्मिक कार्यों की ओर अपना मन जोड़ चुके थे। देवी पूजा और नित्य आरती कर्म करने में उन्हें बहुत आनदं मिलता था।

लेकिन पिता की मृत्यु के उपरांत हालात और बिगड़ गए परिवार का पोषण करने की जवाबदारी उनके बड़े भाई जिनका नाम श्री राजकुमार था पर आ गई और वे अतिरिक्त आय के लिए कलकत्ता आ गए। अब बालक गदाधर गांव में ही रहकर अपने परिवार का ध्यान रकते और मंदिर में पूजा आरती का नित्य काम संभालते और लोगों की सेवा कार्य भी निरंतर करते रहते।

रामकृष्ण परमहंस का आद्यात्मिक जीवन

दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण वहाँ की रानी रश्मोनी देवी के द्वारा करवाया गया था जो एक प्रसिद्ध परोपकारी इंसान थी। मंदिर के निर्माण के बाद रानी के सामने यह चुनौती थी की काली मंदिर में माता काली की पूजा आराधना के लिए उचित और योग्य पुजार के रूप में किसे चुना जाए।

ऐसे में रानी रश्मोनी के जमाता जिनका नाम माथुरबाबू था उन्होंने रामकृष्ण जी के बड़े भाई रामकुमार जी को मंदिर में मुख्य पुजारी का पद संभालने के लिए आग्रह किया ऐसे रामकुमार जी दक्षिणेश्वर काली मंदिर के मुख्या पुजारी बने।

रामकृष्ण जी के बड़े भाई रामकुमार जी ने कुछ समय बाद रामकृष्ण जी को भी कलकत्ता बुलावा भेजा मंदिर आने पर वे अपने भाई के साथ मंदिर में नित्य पूजा कर्म में सहयोग करने लगे ऐसे ही उनकी भक्ति की ज्योति और प्रबल होती गई। रामकुमार जी की मृत्यु के बाद रामकृष्ण जी को मंदिर के मुख्य पुजारी का पद सौप दिया गया।

रामकृष्ण जी माता की भक्ति में इतने लीन हो गए की उन्हें दुनिया की शुध ही नहीं रही। माता काली के लिए उनकी भक्ति इतनी चरम पर थी कि उन्हें माता काली खुद दर्शन दिया करती और एक माता की भातिं उन्हें भोजन कराती। धीरे धीरे उनके जीवन में कई अलौकिक घटनाएं घटी जिसके कारण वे भक्ति के चरम स्थान पर पहुंच गए।

रामकृष्ण जी ने औपचारिक दीक्षा सन्यासी और महान संत तोतापुरी महाराज जी से ग्रहण कि तोतापुरी महाराज जी ने त्याग के कर्मकांड के माध्यम से रामकृष्ण जी का मार्गदर्शन किया और उन्हें अद्वैत वेदांत, हिंदू दर्शन की शिक्षा और आत्मा के गैर-द्वैतवाद और ब्रह्म के महत्व को समझने में उनका मार्गदर्शन किया।

रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु

गले की बीमारी के चलते 16 अगस्त 1886 को कोसीपोर के बाग घर में उनका निधन हो गया।

 

रामकृष्ण परमहंस के उपदेश – Ramkrishna Paramhans Ke Updesh

  • तुम रात को आसमान में बहुत सारे तारों को देखते हो लेकिन सूर्य निकलने के बाद तारे नहीं दिखते। क्या तुम कहोगे कि दिन में आसमान में तारे होते ही नहीं ? सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम अपने अज्ञान की वजह से भगवान को देख नहीं पाते, ये मत कहो कि भगवान जैसी कोई चीज नहीं होती।
  • जिस प्रकार मिट्टी के खिलौने का हाथी या फल देखना असली हाथी या फल की याद दिलाते हैं, उसी प्रकार ईश्वर के चित्र और मूर्तियाँ भी उस परमात्मा की याद दिलाते हैं जोकि सनातन और सर्वव्यापी है।
  • भगवान के कृपा की हवा तो हमेशा ही बह रही है, ये हमारे हाथ में है कि हम अपनी नाव की पाल चढ़ायें और ईश्वरीय कृपा की दिशा में बढ़ जायें।
  • मनुष्य तकिये के कवर जैसा है। एक कवर का रंग लाल है, दूसरे का नीला और तीसरे का रंग काला है ; लेकिन सबके अंदर वही रुई भरी हुई है। यही मनुष्यों में भी है, एक सुंदर है, दूसरा बदसूरत है, तीसरा साधु है और चौथा दुष्ट है लेकिन ईश्वरीय तत्व सबके अंदर है।
  • भगवान जब जगह है लेकिन हर मनुष्य के रूप में वो तुम्हारे समक्ष ही तो है। प्राणीमात्र को ईश्वर मानते हुए उसकी सेवा करो। यह ईश्वर की पूजा के समान ही फलदायी है।
  • जरूरी चीज है छत तक पहुंचना। तुम पत्थर की सीढ़ी चढ़कर जा सकते हो, बांस की सीढ़ी से चढ़कर जा सकते हो या रस्सी से भी चढ़कर जा सकते हो। तुम सिर्फ एक बांस की मदद से भी चढ़कर ऊपर पहुँच सकते हो। इसी तरह भगवान को भी किसी भी मार्ग से प्राप्त किया जा सकता है। सभी धर्म के मार्ग सत्य हैं।
  • तुम ईश्वर की चाहे जैसे प्रार्थना करो, वो उन तक पहुँचती है। ध्यान रखो वो चींटी के कदमों की आहट भी सुन सकते हैं।
  • ईश्वर के अनंत नाम हैं और असंख्य रास्ते हैं जिससे उनसे संपर्क किया जा सकता है। तुम जिस भी नाम और रूप से उनकी वंदना करोगे, उसी से वो तुमको प्राप्त हो जायेंगे।
  • सूर्य का प्रकाश हर जगह एक समान ही पड़ता है लेकिन सिर्फ चमकदार सतह जैसे पानी की सतह या दर्पण ही उसे परावर्तित करता है। ईश्वर का दिव्य प्रकाश भी ऐसा ही है। ये सबके हृदय पर बराबर, बिना पक्षपात के पड़ता है परंतु केवल पवित्र और सच्चे हृदय वाले लोग ही उस दिव्य प्रकाश को सही से ग्रहण और परावर्तित कर पाते हैं।
  • भगवान तो सबके मन में हैं लेकिन सबका मन भगवान में नहीं लगा है, इसीलिए हम कष्ट और दुर्गति भोगते हैं।

स्वामी रामकृष्ण परमहंस से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब

Q.- स्वामी रामकृष्ण परमहंस का असली नाम क्या था?
Ans:- स्वामी रामकृष्ण परमहंस का असली नाम गदाधर था?

Q.- श्रीरामकृष्ण परमहंस का जन्म कहाँ हुआ था?
Ans:- रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म 18 फरवरी 1836 को भारत के बंगाल राज्य में हुगली जिले के कामारपुकुर गांव में एक गरीब ब्राम्हण के घर हुआ था।

Q.- श्रीरामकृष्ण परमहंस के गुरु का नाम क्या था ?
Ans:- तोतापुरी महाराज उनके गुरु हुवे तोतापुरी महाराज जी ने त्याग के कर्मकांड के माध्यम से रामकृष्ण जी का मार्गदर्शन किया और उन्हें अद्वैत वेदांत, हिंदू दर्शन की शिक्षा और आत्मा के गैर-द्वैतवाद और ब्रह्म के महत्व को समझने में उनका मार्गदर्शन किया।

Q.- परमहंस का मतलब क्या होता है?
Ans:- वह संन्यासी जो ज्ञान की परमावस्था को पहुँच गया हो

Q.- रामकृष्ण परमहंस की पत्नी का नाम क्या था ?
Ans:- शारदा देवी से उनका विवहा हुआ था।

Q.- रामकृष्ण परमहंस कौन थे ?
Ans:- एक महान संत एवं विचारक

Q.-  रामकृष्ण परमहंस की जयंती कब मनाई जाती है?
Ans:- फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भारत के महान संत एवं विचारक रामकृष्ण परमहंस का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 15 मार्च को है।

Q.-  रामकृष्ण मिशन की स्थापना कब और किसने की ?
Ans:- रामकृष्ण मिशन की स्थापना १ मई सन् १८९७ को रामकृष्ण परमहंस के परम् शिष्य स्वामी विवेकानन्द ने की। इसका मुख्यालय कोलकाता के निकट बेलुड़ में है।

मुझे उम्मीद है आपको यह जानकारी Swami Ramakrishna Paramahamsa in hindi पसंद आई होगी। आपने हमे इतना समय दिया आपका बहुत धन्येवाद।

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