Monday, August 8, 2022
Homehindilekhताज महल कब बना था? | taj mahal kab bana tha

ताज महल कब बना था? | taj mahal kab bana tha

taj mahal kab bana tha:- ताज महल भारत की ऐसी ईमारत है जिसे पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त है। और Tourists के मन पसंद जगहों में शामिल भी है। यह खूबसूरत ईमारत भारत के  उत्तर प्रदेश राज्य में यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। इसके निर्माण में सफेद मार्बल का उपयोग किया गया है जो इसे बहुत ही ज्यादा सुंदरता प्रदान करता है। यह ईमारत लोगों के बीच प्यार की निसानी के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। 

इस का निर्माण मुग़ल शासक शाहजहाँ ने अपनी सबसे प्रिय पत्नी मुमताज की याद में उसकी मृत्यु के बाद बनवाया था। जिस में आज भी शाहजहाँ और मुमताज की कब्र है। यह एक तरह का बहुत खूबसूरत मकबरा है। इस जगह पहुंचने का अच्छा समय सुबह सुबह और शाम का होता है जब इसकी सुंदरता और भी सुन्दर हो जाती है।

ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने करवाया था ताजमहल को बनाने मे करीब 38 वर्ष लगे थे। 1 सितम्बर 1593 से 17 जून 1631 तक का समय ताज महल को बनवाने में लगा था। मुमताज महल परसिया देश की राजकुमारी थी जिसने मुग़ल सम्राट जहांगीर से निकाह किया था और जहांगीर ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। 

1631 के बाद ही शाहजहाँ ने आधिकारिक रूप से ताजमहल का निर्माण कार्य की घोषणा की तथा 1632 में ताजमहल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। ताजमहल के निर्माण में काफी समय लगा. वैसे तो इस मकबरे का निर्माण 1643 में ही पूरा हो गया था, परंतु इसके सभी पहलुओं के काम करते करते इसे बनाने में लगभग दस साल और लग गए। 

taj mahal kab bana

सम्पूर्ण ताजमहल का निर्माण 1653 में लगभग 320 लाख रुपये की लागत में हुआ, जिसकी आज की कीमत 52.8 अरब रुपये (827 मिल्यन डॉलर) है। 

इसके निर्माण में 20,000 कारीगरों ने मुग़ल शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी के अधीन कार्य किया, कहते हैं कि इसके निर्माण के बाद शाहजहाँ ने अपने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिये। 

 

खुर्रम यानी शाहजहाँ का संक्षिप्त इतिहास

खुर्रम 1592-1666 सम्राट जहांगीर के तीसरे बेटे थे और मारवाड़ के शाही परिवार की राजकुमारी मनमती से पैदा हुए थे। ऐसे समय में जब उनके माता पिता की तरह की शादी एक तरह से राज्य नीति होती थी और दो राजवंशों के बीच किसी समझौते का तय करने जैसा होता था, ऐसे में खुर्रम और अर्जुमंद की मोहब्बत की दास्तान बहुत अनूठी है। खुर्रम अपने दादा मुगल बादशाह अकबर के लाड़ले थे और अपने भाइयों के साथ वैसे ही बड़े हुए जैसे एक मुगल राजकुमार को होना चाहिए था।

मुगल दरबार में हर ओर साजिशें थी और खुर्रम के सबसे बड़े भाई राजकुमार खुसरो ने सन् 1606 में अपने पिता जहांगीर के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह को कुचल दिया गया और राजकुमार खुसरो को अंधा कर दिया गया। खुर्रम इस विद्रोह से दूर रहे और उनकी वफादारी के इनाम के तौर पर उन्हें 15 साल की उम्र में जहांगीर का वारिस घोषित किया गया। उसी साल उनकी मुलाकात और मोहब्बत अर्जुमंद से हुई जो तब सिर्फ 14 साल की थी।

 

मुमताज महल का संक्षिप्त इतिहास

अर्जुमंद बानो बेगम महारानी नूरजहां के बड़े भाई असफ खान की बेटी थी। वह एक रईस फारसी व्यक्ति मिर्ज़ा गियास बेग़ की पोती थी जो बाद में मुगल दरबार में खजांची और इतिमाद-उद-दौला बने। खुर्रम और अर्जुमंद की मुलाकात महल की चारदीवारों के बीच बने मीना बाज़ार में हुई थी। मीना बाज़ार में जहांगीर की रानियां और दरबार की अन्य अमीर औरतें उन सामानों का बेचती थीं जो दरबारियों की खरीद के लिए बनवाया जाता था।

अर्जुमंद भी ऐसी ही एक दुकान पर थी जहां उन्होंने हाथों से रंगे कुछ मिट्टी के बर्तन बेचने के लिए रखे थे। कहानी यह है कि खुर्रम इतने दीवाने हो गए थे कि उन्होंने सोने के एक सिक्के से उस दुकान का सारा सामान खरीद लिया था। उन दोंनों की उम्र कम होने के कारण सन् 1612 में निकाह से पहले पांच सालों के लिए उनकी सगाई की गई। निकाह के बाद अर्जुमंद को ‘मुमताज महल बेगम’ का खि़ताब दिया गया

 

महाराज और महारानी संबंध 

उनकी शादी बहुत सुखद थी और खुर्रम को सन् 1628 में अपने पिता जहांगीर की मौत के बाद सिंहासन मिला और वो सम्राट शाहजहां हो गए। मुमताज महल से मिला साथ शाहजहां की ताकत का काम करता था। अपने शादीशुदा जीवन मेें उनके 14 बच्चे हुए जिनमें से सात जीवित रहे। मुमताज महल शाहजहां के साथ पूरे मुगल साम्राज्य का दौरा करतीं थीं, फिर चाहे वो राज्य की सीमा के पास लगे कैंप ही क्यों ना हों। अपने महलों से दूर रहने पर भी मुमताज महल शाहजहां को घर और परिवार का सुख देती थीं। ऐसे ही एक सैन्य अभियान में सन् 1631 में मुमताज महल ने चैदहवें बच्चे गौहरा बेगम को जन्म देते समय आखिरी सांस ली। गौहरा बेगम 75 साल की उम्र तक जीवित रही। उस समय के दरबार के रिकाॅर्ड अपनी खूबसूरत बेगम और जीवनसाथी के खोने पर शाहजहां के अपार ग़म का बयान करते हैं। यह कहा जाता है कि शाहजहां एक साल के लिए शोक में चले गए थे और उन्होंनें कभी दोबारा शादी नहीं की।

 

ताज महल सा कोई और मकबरा नहीं

मुमताज महल के शव को बुरहानपुर के एक बागीचे में दफनाया गया था, लेकिन बाद में उसे खोदकर बाहर निकाला गया और उसे सुनहरे कास्केट में आगरा ले जाया गया। उनके शव को अस्थाई तौर पर यमुना नदी के किनारे बने एक शाही बाग में दफनाया गया। शाहजहां ने बुरहानपुर का सैन्य अभियान पूरा किया और अपने खोए हुए प्यार की याद में एक मकबरे की कल्पना करने लगे।

शाहजहां के शासनकाल को मुगल वास्तुकला का सुनहरा काल माना जाता है जिसमें उन्होंनें दिल्ली में लाल किला और जामा मस्जिद सहित शाहजहांनाबाद शहर बनाया और मोती मस्जिद आगरा में बनवाई। उन्होंने लाहौर के किले का विस्तार किया और कश्मीर के श्रीनगर में बाग बनवाए। उनकी वास्तुकला में बहुत रुचि थी और वह अपने पीछे एक विरासत छोड़कर जाना चाहते थे, जो सिर्फ मुगल साम्राज्य के विस्तार के तौर पर ही ना हो बल्कि वास्तुकला, कला और सौंदर्यशास्त्र के तौर पर भी हो। उनकी वास्तुकला की उपलब्धि का शिखर यह मकबरा है जिसके निर्माण में 22 साल लगे।

यह 1632 से 1653 के समय में बना और ताज महल मुमताज महल के लिए शाहजहां की मोहब्बत का खास इज़हार था। ताज महल की मुख्य मंजिल के नीचे एक कमरे में उनकी सजी हुई कब्र पास पास बनी है। अब कभी ना जुदा होने वाला उनका यह साथ ताज महल का कभी ना भूल पाने वाला इतिहास है

 

 ताजमहल की वास्तुकला 

मुग़ल शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी के नेतृत्व में ताजमहल का कार्य हुआ। उस्ताद अहमद लाहौरी मुख्य वास्तुकार थे उनके साथ ईरान में शिराज के अमानत खान जो मुख्य सुलेखक थे, दिल्ली के चिरंजीलाल जो कीमती पत्थरों के विशेषज्ञ थे, वे मुख्य सजावटी मूर्तिकार थे। मुहम्मद हनीफ राजगरों के मुख्य पर्यवेक्षक और अब्दुल करीम मैमूर खान और मकरामत खान निर्माण स्थल पर दैनिक निर्माण के आर्थिक प्रबंध देखते थे। ताजमहल सफेद और पाॅलिश किए संगमरमर को काटकर फूल और ज्यामितीय डिजाइनें बनाईं गईं हैं और उसे कीमती और अर्द्ध कीमती पत्थरों से जटिल आकार में मकबरे की भीतरी दीवारों पर जड़ा गया है। जड़ाउ काम के लिए इस्तेमाल पत्थरों में जेड, जैस्पर और काले और पीले रंग के संगमरमर शामिल हैं।

ताजमहल का निर्माण करने के लिए इसकी वर्गाकार नींव रखी गई और सफ़ेद संगमरमर का स्तमाल कर इसका निर्माण किया गया। ताजमहल वास्तव में एक मकबर है जिसमे शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज की कब्र है। ताजमहल के शीर्ष पर एक विशाल गुंबद स्थित है। अधिकतर मुगलों के मकबरे में इस प्रकार के गुण मत देखे गए हैं जो फारसी कला से निर्मित है।

मुमताज महल का कब्र कक्ष के मध्य में स्थित है जिसका आकार आयताकार है।

मकबरा बहुमूल्य पत्थरों एवं रत्नों से जरा है जोकि मुमताज महल की खूबसूरती का पहचान है। शाहजहां का कब्र मुमताज की कब्र के दक्षिण और है यह दृश्य पूरे ताजमहल के दृश्यों में से सबसे अनोखा एवं अद्भुत दृश्य है। पहले यह निर्धारित नहीं था, कि शाहजहां का कब्र मुमताज की कब्र के दाहिनी ओर ही बनेगा यह कब्र बाद में बनाया गया।

यह मक़बरा केवल मुमताज महल के लिए ही बनवाया गया था। शाहजहां की कब्र मुमताज महल के कब्र से बड़ी है। मुमताज महल के शव वाला संगमरमर का ताबूत निचले चेंबर में संगमरमर के एक आधार पर है। इस ताबूत पर उनका नाम और उनकी तारीफ लिखी हुई है। उनकी मज़ार पर नक्काशी का काम और लेखनी का काम है जो कि शाही मुगल महिलाओं के ताबूत पर काफी देखा जाता है। शाहजहां की कब्र, जो कि आकार में बड़ी है और समान तरह के नक्काशी के काम से सजी है, केंद्र से थोड़ा हटकर है। उनके ताबूत पर उनका नाम और उनकी मौत की तारीख लिखी है। उनकी मज़ार पर एक कलम बाॅक्स की नक्काशी है जो कि मुगल रईसों और सम्राटों की कब्रों पर बहुत देखी जाती है।

ताजमहल से संबंधित प्रचलित कथाएं |

बता दें की इस इमारत का निर्माण सदा से प्रशंसनीय एवं विश्व में का विषय रहा है। यह इमारत धर्म संस्कृति एवं भूगोल की सीमाओं से परे लोगों के दिलों को जीत रहा है एवं कई लोगों ने इस इमारत को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया दी है, जो कि अनेक विद्वानों द्वारा किए गए मूल्यांकन से ज्ञात होता है। आइए हम जानते हैं ताजमहल से जुड़ी कुछ प्रचलित कथाएं।

यह कथा काफी पुरानी है जिसमें यह बताया गया है कि शाहजहां की इच्छा थी कि ताजमहल के जैसा ही एक काला ताजमहल का निर्माण यमुना के उस पार ताजमहल के सम्मुख किया जाए जिसमें खुद शाहजहां का कब बने यह अनुमान जीन बैप्टिस्ट के द्वारा लगाया गया है, जो एक प्रथम यूरोपीय ताजमहल पर्यटक थे।

जो आगरा 1665 में घूमने आए थे। अपने कथन अनुसार उन्होंने बताया कि शाहजहां को उसके बेटे औरंगजेब के द्वारा एक तयखाने में कैद कर दिया गया था। इससे पहले कि वह काला ताजमहल बना पाए।

इस तथ्य को बल तब मिला जब यमुना के उस पार मेहताब बाग में काले रंग के संगमरमर का टुकड़ा प्राप्त हुआ। परंतु 1990 के दशक में एक खुदाई से पता चला कि यह कोई काला संगमरमर नहीं बल्कि सफेद संगमरमर है जोकि काला पड़ गया है।

काले मकबरे के बारे में वर्ष 2006 में एक अधिक विश्वसनीय कथा पुरातात्विक द्वारा बताई गई जिसमें उन्होंने कहा कि मेहताब बाग में एक केंद्रीय सरोवर कि पुनर्स्थापना की गई थी। जिसमें श्वेत मकबरे की परछाई सरोवर के गहराई में देखी जा सकती थी।

इस पर छाई में संतुलन बनाए रखने के लिए एवं सरोवर की स्थिति का निर्धारण करने के लिए एक काले मकबरे का विचार शाहजहां के मन में आया जिससे प्रतिबिंब ठीक उस सरोवर में प्रतीत हो इस कथा से शाहजहां द्वारा साले मकबरे बनाए जाने का विचार स्पष्ट होता है।

आपने भी कई कथाएं ताजमहल से जुड़ी सुनी होंगी जिसमें यहां तक कहा गया है कि जिन व्यक्तियों ने ताजमहल के निर्माण में अपना योगदान दिया शाहजहां के द्वारा उनका हाथ कटवा दिया गया ताकि पुनः वैसा ही ताजमहल निर्मित ना हो सके।

परंतु इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है कुछ लोगों का कहना यह भी है कि ताजमहल के निर्माण में जितने भी कार्य कर सम्मिलित हुए थे उनसे शाहजहां द्वारा पहले ही करारनामा करवा लिया गया था कि वह ऐसा पुनः दूसरा ताजमहल का निर्माण नहीं करेंगे।

ऐसे ही दावे कई इमारतों के बारे में किए जाते रहे हैं। परंतु इसका कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है यह केवल एक अफवाह है क्योंकि उस समय के किसी भी काव्य रचना में इसका उल्लेख नहीं मिलता है।

एक कथा और प्रचलित है कि लॉर्ड विलियम बेंटिक जो कि भारत के गवर्नर जनरल थे 1830 के दशक में ताजमहल को विध्वंसक करके उसका संगमरमर एवं उसमें लगे अन्य बहुमूल्य पत्थर को नीलाम करने की योजना बनाई थी। यह बात तब सामने आई जब आगरा के किले में पड़ा कुछ बेकार सा संगमरमर को लॉर्ड विलियम बेंटिक ने नीलाम किया था।

एक हिंदू राजा द्वारा ताज महल बनवाने का किस्सा: ताज महल के इर्द गिर्द कई कहानियां घूमती हैं कि ताज महल मुगल स्मारक नहीं है बल्कि वह शाहजहां के समय से पहले भी मौजूद था। इस किस्से को लेकर कोई प्रमाण नहीं है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट दोनों ही इस विचार से संबंधित याचिकाएं ठुकरा चुके हैं।

 

ताजमहल के जैसी ही अन्य प्रतिकृतियां | Reproductions similar to the TajMahal

विंडो ऑफ दी वर्ल्ड थीम पार्क चीन के शेनजे़न शहर में स्थित है। जो ताजमहल की प्रतिकृति है। इसके अलावा अन्य कई इमारतें ऐसी है, जो ताजमहल के समरूप ही दिखाई देती है, अर्थात ताजमहल के ही समरूप है।

जैसे ताजमहल से प्रेरित होकर बनी बांग्लादेश का ताजमहल, औरंगाबाद एवं महाराज में बना बीवी का मकबरा, अटलांटिक सिटी के न्यूजर्सी में स्थित ट्रंप ताज महल,त्रिपोली श्राइन टेंपल, इत्यादि। साथ ही साथ महारानी विक्टोरिया के सम्मान में जोकि इंग्लैंड की महारानी थी कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल नामा स्मारक बनाया गया, जो कि ताजमहल से काफी हद तक प्रेरित है।

भले ही यह सारे स्मारक ताजमहल की प्रतिकृतियां हैं। परंतु ताजमहल तो ताजमहल ही है उसकी तुलना किसी अन्य स्मारक से नहीं की जा सकती।

ताज महल का महत्व

ताज महल का भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल वास्तुकला के प्रतीक के तौर पर बड़ा महत्व है। इस मकबरे और इसके परिसर के आसपास के भवन मुगल इतिहास और मुगल वास्तुकला दोनों के सबक हैं। सुलेखों, जटिल नक्काशी, भवनों के सही अनुपात और निर्माण की सटीक ज्यामितीय के अध्ययन से कोई भी ना सिर्फ उस समय के शिल्प कौशल पर हैरान हो जाएगा, बल्कि इस कालातीत चमत्कार के पीछे की प्रेरणा पर भी। इतिहास के विद्वान, वास्तुकार, कपड़े और गहनों के डिजाइनर, चित्रकार और फोटोग्राफर सब को इस प्रेम के स्मारक और खूबसूरत आश्चर्य के ऐतिहासिक मकबरे से प्रेरणा मिली है।

ताज महल का महत्व सिर्फ भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल वास्तुकला के प्रतीक के तौर पर ही नहीं है, बल्कि मुगल काल और हाल के दिनों के दूसरे स्मारकों की प्रेरणा के तौर पर भी है। 

 

F & Q 

ताज महल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जबाव 

सवाल:- ताजमहल कौन से दिन फ्री रहता है?

जवाब:- सोमवार से गुरुवार तक स्मारक खुलता है और शुक्रवार को ताजमहल बंद रहता है।

सवाल:-  ताजमहल खुलने और बंद होने का समय क्या है? 

जवाब:- ताजमहल के खुलने और बंद होने का समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहता है।

सवाल:- ताज महल का टिकिट कितने का है। 

जवाब:- ताजमहल में अभी भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 50 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 1100 रुपये है. वहीं, शाहजहां-मुमताज की कब्र देखने के लिए पर्यटकों को मुख्य गुंबद में जाने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट खरीदना होता है। 

सवाल:- आगरा स्टेशन से ताजमहल की दूरी कितनी है? 

जवाब:- लगभग 4 किलो मीटर की दूरी 

सवाल:– kala taj mahal open hai kya 

जवाब:- अभी कुछ कह नहीं सकते। 

सवाल:– ताज महल में प्रवेश शुल्क

जवाब:- विदेशी सैलानियों के लिए: 750 रुपये

सार्क देशों के नागरिकों और बीआईएमएसटीईसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड के लिए: 510 रुपये

भारतीयों के लिएः 20 रुपये

ताज महल के लिए टिकट भारत में किसी भी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल से खरीदे जा सकते हैं।

15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है चाहे वो भारतीय हों या विदेशी।

मुझे उम्मीद है आपको यह जानकारी  taj mahal kab bana tha पसंद आई होगी। अपने हमे इतना समय दिया आपका बहुत धन्यवाद। 

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular